8:45 pm · बंद करने का वक़्त
शटर गिरता है, और पूरा दिन ग़ायब हो जाता है।
आज चालीस लोग आए। सेवा ली, पैसे दिए, चले गए — और कल तक सब भुला दिया।
मिलिए Grahik से
एक आसान ऐप जो आपके हर ग्राहक को याद रखता है।
Grahik उसी फ़ोन पर चलता है जो आपके पास पहले से है। हर वॉक-इन को एक डिजिटल टोकन मिलता है — ग्राहक को कुछ इंस्टॉल नहीं करना, कोई अकाउंट नहीं बनाना, बस एक लिंक से अपनी बारी देखते रहना।
टोकन ही असली तरकीब है: इसी से एक अजनबी ऐसा ग्राहक बन जाता है जिसे Grahik याद रखता है।
कैसे काम करता है
टोकन से याद तक, तीन क़दम में।
ग्राहक टोकन लेता है
हर वॉक-इन को डिजिटल टोकन या क्यू नंबर दीजिए — उन्हें कोई ऐप डाउनलोड नहीं करनी।
वह विज़िट रिकॉर्ड बन जाती है
Grahik चुपचाप हर बार ग्राहक और उसकी विज़िट हिस्ट्री बना देता है।
आप देखते हैं कौन लौट रहा है, और कितना कमा रहे हैं
डैशबोर्ड पर बार-बार आने वाले ग्राहक, ख़र्च और ट्रेंड — सब एक नज़र में।
8:45 pm · Grahik के साथ
वही शटर। वही दिन। कुछ खोया नहीं।
फ़ोन निकालिए। कौन आया, कौन लौटकर आया, कितना कमाया — सब बस वहीं है।
Grahik के बिना
- आज कौन आया?
- —
- रेगुलर कौन है?
- —
- इस हफ़्ते का कुल?
- —
Grahik के साथ
- आज की विज़िट
- 41
- लौटने वाले ग्राहक
- 12
- जमा हुआ
- ₹4,200
इसके पीछे बस तीन आसान स्क्रीन:
लाइव क्यू
देखिए कौन इंतज़ार कर रहा है, किसकी सेवा चल रही है, और इंतज़ार कितना लंबा है। ग्राहक अपने फ़ोन से अपनी बारी देख लेते हैं।
कस्टमर हिस्ट्री
हर विज़िट अपने आप उस ग्राहक के नाम दर्ज हो जाती है। किसी को भी खोलिए और देखिए वह आख़िरी बार कब आया था और क्या लिया था।
पैसा
कैश और UPI दोनों विज़िट पूरी होते ही रिकॉर्ड हो जाते हैं, इसलिए दिन और हफ़्ते का कुल बस वहीं होता है।